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फ़रवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पृथ्वी की आंतरिक संरचना।(Structure of the Earth's Interior)

पृथ्वी की आंतरिक संरचना।(Structure of the Earth's Interior) पृथ्वी की आंतरिक संरचना पृथ्वी की आंतरिक संरचना का प्रत्यक्ष अनुमान लगाना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि पृथ्वी पर भूपर्पटी से कुछ ही किमी की गहराई तक हम अध्ययन कर पा ये हैं। दक्षिण अफ्रीका की सोने की खानें 3 से 4 किमी तक गहरी है वहीं दूसरी ओर आर्कटिक महासागर में कोला क्षेत्र (Kola Area) में 12 किमी की गहराई तक प्रवेधन (Drilling) किया गया है। इससे अधिक गहराई में जा पाना असंभव है, क्योंकि इतनी गहराई पर तापमान बहुत अधिक होता है। इसलिए यह संभव नहीं है कि कोई पृथ्वी के केंद्र तक पहुंच कर उसका निरीक्षण कर सके अथवा वहां के पदार्थों का एक नमूना प्राप्त कर सके। फिर भी यह आश्चर्य से कम नहीं है कि ऐसी परिस्थितियों में भी हमारे वैज्ञानिक, हमें यह बताने में सक्षम हुए हैं कि पृथ्वी की आंतरिक संरचना कैसी है और कितनी गहराई पर किस प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं। पृथ्वी के धरातल का स्वरूप पृथ्वी की आंतरिक अवस्था और संरचना का परिणाम होता है अतः पृथ्वी की आंतरिक संरचना का विशेष महत्व है पृथ्वी की आंतरिक स्थिति कैसी है? यह आज भी एक रहस्य बना

पृथ्वी के बारे में रोचक तथ्य,(Interesting Facts About the Earth)

पृथ्वी के बारे में रोचक तथ्य,(Interesting Facts About the Earth) The Earth 1. पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.54 अरब वर्ष पहले हुआ था और पृथ्वी को लेकर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस ग्रह पर लगभग 4.1 अरब वर्ष पहले जीवन का अस्तित्व आंरभ हुआ था। 2. पृथ्वी का औसत घनत्व लगभग 5.523 g/cm³ व भूतल क्षेत्र 51,00,64,472 KM² है। 3. 3,959 मील की त्रिज्या के साथ, पृथ्वी हमारे सौर मंडल का पाचवां सबसे बड़ा ग्रह है। 4. पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसका नाम ग्रीक या रोमन देवता के नाम पर नहीं रखा गया है। उदाहरण के तौर पर बृहस्पति ग्रह का नाम रोमन देवताओं के राजा और यूरेनस ग्रह का नाम आकाश के ग्रीक देवता के नाम पर रखा गया है, लेकिन पृथ्वी का नाम अंग्रेजी/ जर्मन भाषा से आया है, जिसका अर्थ है 'भू'। 5. पृथ्वी सौरमंडल का सबसे घना (Dense) ग्रह है। यह ग्रह के भाग के अनुसार बदलता रहता है। उदाहरण के लिए धात्विक (Metallic) कोर, क्रस्ट की तुलना में सघन है।  6. हमारे ग्रह का 70% हिस्सा महासागरों से ढका है। शेष 30% ठोस जमीन है, जो समुद्र के स्तर से ऊपर है। 7. पृथ्वी का सिर्फ 3% पानी ही ताज़ा है, बाकी 97% न

भारत में अपवाह प्रतिरूप,(Drainage Pattern in India)

भारत में अपवाह प्रतिरूप,(Drainage Pattern in India) अपवाह प्रतिरूप अपवाह प्रतिरूप किसे कहते हैं? किसी नदी के रेखीय स्वरूप को अपवाह रेखा कहते हैं। कई रेखाओं के योग को अपवाह  रेखा जाल कहते हैं। किसी नदी बेसिन में अपवाह रेखा जाल के दृश्य स्वरूप को अपवाह प्रतिरूप कहते हैं। जैसे- वृक्षाकर अपवाह प्रतिरूप, विभिन्न अपवाह बेसिन, जो एक सागर में गिरती हैं, एक अपवाह तंत्र कहलाती हैं, जैसे- भारत में बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र तथा अरब सागरीय अपवाह तंत्र। जल अपवाह प्रतिरूपों पर चट्टानों की  क ठोरता, उनके प्रतिरोध (Resistance), चट्टानों की संरचना, अपक्षय एवं अपरदन (Weathering and Erosion), जलवायु, जल चक्र, भूगर्भीय इतिहास इत्यादि का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ता है। भारत में भौगोलिक उच्चावचीय विषमताओं के कारण भारत के अपवाह तंत्र में निम्न अपवाह   प्रतिरूप पाए जाते हैं: यथा- 1. पूर्ववर्ती अपवाह प्रतिरूप (Antecedent or Inconsequent Drainage Pattern)-   इस प्रतिरूप को पूर्वानुवर्ती अपवाह प्रतिरूप भी कहते हैं। ऐसी नदियां जो हिमालय के उत्थान से पहले उसी स्थान पर बहती थी और हिमालय के उ

भारत का अपवाह तंत्र। (Drainage system of india in hindi)

अपवाह तंत्र किसे कहते हैं? या अपवाह तंत्र क्या है? अपवाह का अभिप्राय जल धाराओं तथा नदियों द्वारा जल के धरातलीय प्रवाह से है। अपवाह तंत्र या प्रवाह प्रणाली किसी नदी तथा उसकी सहायक धाराओं द्वारा निर्मित जल प्रवाह की विशेष व्यवस्था है यह एक तरह का जालतंत्र या नेटवर्क है जिसमें नदियां एक दूसरे से मिलकर जल के एक दिशीय प्रवाह का मार्ग बनाती हैं। किसी नदी में मिलने वाली सारी सहायक नदियां और उस नदी बेसिन के अन्य लक्षण मिलकर उस नदी का अपवाह तंत्र बनाते हैं।  भारत का अपवाह तंत्र एक नदी बेसिन आसपास की नदियों के बेसिन से जल विभाजक के द्वारा सीमांकित किया जाता है। नदी बेसिन को एक बेसिक जियोमॉर्फिक इकाई (Geomorphic Unit) के रूप में भी माना जाता है जिससे किसी क्षेत्र एवं प्रदेश की विकास योजना बनाने में सहायता मिलती है। नदी बेसिन के वैज्ञानिक अध्ययन का महत्व निम्न कारणों से होता है- (i) नदी बेसिन को एक अनुक्रमिक अथवा पदानुक्रम में रखा जा सकता है। (ii) नदी बेसिन एक क्षेत्रीय इकाई (Area Unit) है जिसका मात्रात्मक अध्ययन किया जा सकता है और आंकड़ों के आधार पर प्रभावशाली योजनाएं तैयार की जा सकती हैं। (i