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दिसंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास,(Geological History Of the Earth)

पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास,(Geological History Of the Earth) पृथ्वी का भूवैज्ञानिक इतिहास हमारी पृथ्वी की  आयु 4 .6 अरब  वर्ष है। उक्त आयु  की पुष्टि उल्का  पिंडों एवं चंद्रमा के चट्टानों के विश्लेषण एवं परीक्षण से ज्ञात हुआ है। किंतु पृथ्वी के सर्वाधिक प्राचीन चट्टानों के रेडियोधर्मी पदार्थों के परीक्षणोपरांत 'पियरे क्यूरी'   एवं 'रदरफोर्ड' के द्वारा पृथ्वी की आयु 3.9 अरब वर्ष निर्धारित की गई है। पृथ्वी के भूगर्भिक इतिहास की व्याख्या का सर्वप्रथम प्रयास फ्रांसीसी वैज्ञानिक 'कास्ते-दी-बफन' ने किया। वर्तमान समय में पृथ्वी के इतिहास को अधोलिखित कालखंडों में विभक्त किया गया है। यथा- 1 . महाकल्प (Era)- यह सामान्यतः सबसे बड़ा कालखंड होता है। 2 . युग (Epoch)- महाकल्पों को पुनः युगों में विभाजित किया गया है, जिन्हें क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा चतुर्थ युग कहा जाता है। 3 . शक या कल्प (Period)- प्रत्येक युग को छोटे-छोटे शकों अथवा कल्पों में विभाजित किया गया है। पृथ्वी के भूगर्भिक इतिहास से संबंधित प्रमुख तथ्य- ➡️ आद्य कल्प (Archaean or Azoic)- आद्य कल्प की चट

पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई,(Origin of the Earth)

  पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई,(Origin of the Earth) Big Bang पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में सर्वप्रथम तर्कपूर्ण परिकल्पना का प्रतिपादन फ्रांसीसी वैज्ञानिक कास्ते दी बफन   द्वारा 1749 ईस्वी में किया गया। वर्तमान समय में पृथ्वी व अन्य ग्रहों की उत्पत्ति के संदर्भ में दो प्रकार की संकल्पना दी गई हैं-  (1). अद्वैतवादी संकल्पना (MonisticConcept)-  इसमें एक ही तारे से संपूर्ण ग्रहों की उत्पत्ति को स्वीकार किया गया है। (2). द्वैतवादी संकल्पना (Dualistic Concept)-   इसमें दो तारों से ग्रहों की उत्पत्ति को प्रमाणित किया गया है। ➡️ अद्वैतवादी संकल्पना (Monistic Concept)-  ज्ञातव्य है कि अद्वैतवाद संकल्पना को 'पैतृक संकल्पना' (Parental Hypothesis) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसके अनुसार संपूर्ण ग्रहों की उत्पत्ति में एक ही पिता तारे का योगदान है इस मान्यता वाली प्रमुख संकल्पनाएं तथा उनके प्रतिपादक निम्नलिखित हैं- (1).पुच्छल तारा परिकल्पना (Comet Hypothesis)-   इस परिकल्पना के अनुसार बहुत समय पहले ब्रह्माण्ड में घूमता हुआ एक विशालकाय पुच्छल तारा सूर्य के निकट से गुजरते वक्त सूर्य

अक्षांश एवं देशांतर रेखा,(Latitude and Longitude)

भूमिका - पृथ्वी की सतह पर किसी भी बिंदु की स्थिति अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं के द्वारा निर्धारित की जाती है। अक्षांश एवं देशान्तर रेखाएं ➡️ अक्षांश रेखाएं (Latitude)- विषुवत रेखा के उत्तर या दक्षिण स्थित किसी भी स्थान की विषुवत रेखा से थोड़ी दूरी को उस स्थान का अक्षांश कहा जाता है, तथा समान अक्षांशों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को अक्षांश रेखा कहा जाता है। अर्थात् ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा अक्षांश होती है जिसे अंश में प्रदर्शित किया जाता है। अक्षांश रेखाएं विषुवत रेखा (0° अक्षांश रेखा) के समानांतर होती हैं जिनकी संख्या 180° है। यह रेखाएं 0° से 90° उत्तर एवं दक्षिण तक विस्तृत हैं। विषुवत वृत्त के उत्तर के सभी अक्षांश उत्तरी अक्षांश तथा दक्षिण के सभी अक्षांश दक्षिणी अक्षांश कहलाते हैं। पृथ्वी पर खींचे गए अक्षांश रेेेेखाओं में विषुवत रेखा (Equator) सबसे बड़ा है, जिसकी लंबाई 40069 किमी है। दो अक्षांशों के मध्य की दूरी (1° अक्षांश) लगभग 111 किमी होती है पृथ्वी की गोलाभ आकृति के कारण यह दूरी विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर थोड़ी अधिक होती जाती है। अक्षांश रेखा बन

ग्रहण क्या है? (What is eclipse in Hindi)

ग्रहण क्या है? (What is eclipse in Hindi) सूर्य एवं चंद्र ग्रहण यदि किसी एक प्रकाश बिंदु से मुक्त होने वाले प्रकाश के मार्ग में कोई वस्तु आ जाती है, तो उससे एक छाया बनती है। इसको 'प्रच्छाया ' (Umbra) कहा जाता है। प्रच्छाया के अंतर्गत किसी भी स्थान से देखने पर प्रकाश स्रोत ढका हुआ दिखाई पड़ता है, परंतु यदि प्रकाश स्रोत एक बिंदु न होकर विस्तृत होता है, तो उसके मार्ग में आने वाली वस्तु की छाया के तीन अलग-अलग क्षेत्र होंगे। प्रथम, एक नोंक पर झुकी हुई घनी शंक्वाकार छाया होती है, जो प्रच्छाया होती है। प्रच्छाया में प्रकाश बिल्कुल नहीं दिखाई पड़ता है। इसके दोनों ओर एक नोंक पर झुकी हुई कम घनी छाया होती है, जिसे 'उपछाया ' (Penumbra)  कहा जाता है। इस क्षेत्र में आंशिक छाया होती है अर्थात् यहां आंशिक रूप से प्रकाश भी विद्यमान होता है। ➡️ चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse)-   चंद्रमा के प्रकाशित भाग के ढक जाने को चंद्र ग्रहण करते हैं। इसका कारण चंद्रमा, पृथ्वी एवं सूर्य की सापेक्ष स्थिति है। परिक्रमण करते हुए जब पृथ्वी, सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो चंद्रमा को सूर्य का प्रकाश प

सौर मंडल,(The Solar System in hindi)

सौर मंडल, (The Solar System in hindi)   सौर मंडल। The Solar System           सौर मंडल में सूर्य, पृथ्वी सहित आठ ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह (Asteroides), उल्काएं, पुच्छल तारे (Comets) आदि सम्मिलत हैं। सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है। सभी आठ ग्रह निश्चित कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जो ग्रह सूर्य के जितना निकट है, उसकी परिभ्रमण (Revolution) गति भी उतनी ही अधिक अधिक है। साथ ही साथ ये ग्रह अपनी धुरी पर भी घूर्णन (Rotation) करते हैं। ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, जबकि तारों का अपना प्रकाश होता है। सूर्य अपने आप में खुद ही एक तारा है।   ब्रह्मांड की जानकारी का सबसे आधुनिक स्रोत प्रो. ज्योकरॉय बुरबिज द्वारा, जिन्होंने प्रतिपादित किया कि प्रत्येक गैलेक्सी ताप-नाभिकीय अभिक्रिया के फलस्वरूप काफी मात्रा में हीलियम उत्सर्जित करते हैं । महत्वपूर्ण बिंदु- ब्रह्मांड के नियमित अध्ययन का प्रारंभ क्लॉडियस टॉलेमी द्वारा 140 ईसवी में हुआ। इनका मत था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है तथा सूर्य और अन्य ग्रह इस की परिक्रमा करते हैं। 1543 ईसवी में कॉपरनिकस ने पृथ्वी के बदले सूर्य को के